जितनी पीड़ा तुम सहती हो
उतना ही म सहता हूँ
फर्क है की तुम रोती हो
और म चुप रहता हूँ
दोनों को जब प्रेम है इतना
फ़िर क्यो यह मजबूरी है
फ़िर क्यो इतनी दूरी है
फ़िर क्यो इतनी दूरी है
नींद नही होती आँखों में
रातो में हम जगते है
चाहे कितनी बातें करले
हम तनिक नही थकते है
तुम लिखती हो म लिखता हूँ
रचना किंतु अधूरी है
फ़िर क्यो इतनी दूरी है
फ़िर क्यो इतनी दूरी है
नया नही है अपना रिश्ता
यह सम्बन्ध पुराना है
नित नए सुर जुड़ते जाते
कैसा मधुर तराना है
साँस चले जीवन रहे
इसलिए मिलना जरूरी है
फ़िर क्यो इतनी दूरी है
फ़िर क्यो इतनी दूरी है
कितने अंधेरे थे जीवन में
तुम ज्योति बन आई हो
अब तक तरसा जिन्हें पाने को
वो खुशिया साडी लायी हो
सतरंगी है सपने तुमसे
हर लम्हा सिन्दूरी है
फ़िर क्यो इतनी दूरी है
फ़िर क्यो इतनी दूरी है
A day without you :'-|
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There’s always poet inside you. All you need is to express yourself in a
language you feel comfortable. Of course, you need a small bit of
encouragement an...
9 years ago

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